‘हर फिल्म में सबटाइटल-ऑडियो डिस्क्रिप्शन जरूरी’, CBFC का फैसला, यूजर्स बोले- सारा मजा किरकिरा कर दिया

सेंसर बोर्ड (CBFC) ने ऐलान किया है कि अबसे सभी भारतीय फिल्मों में सबटाइटल्स और ऑडियो डिस्क्रिप्शन शामिल किया जाएगा और यह अनिवार्य है। इस नियम को फिल्मों को और अधिक सुलभ बनाने के मकसद से लाया गया है, पर इसने सोशल मीडिया पर एक बहस छेड़ दी है। नए निर्देश के अनुसार, यह नया नियम 15 मार्च, 2026 से लागू किया जाएगा। साथ ही सेंसर बोर्ड ने यह भी कहा है कि फिल्ममेकर्स सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म सब्मिट करते वक्त इस बात का खास ध्यान रखें कि उसमें सबटाइटल्स और ऑडियो डिस्क्रिप्शन जरूर जोड़ा गया हो।
सेंसर बोर्ड का सभी भारतीय फिल्मों के लिए नियम
सेंसर बोर्ड ने यह भी कहा है कि फिल्ममेकर्स को अपनी फिल्मों को E‑Cinepramaan पोर्टल के जरिए डिजिटल सिनेमा पैकेज (DCPs) के रूप में अपलोड करना होगा। साथ ही उसमें एक्सेसेबिलिटी फीचर्स भी जोड़ने होंगे। इस नियम का उद्देश्य उन दर्शकों के लिए सिनेमा को औ सुलभ बनाना है, जो देख या सुन नहीं सकते।

सेंसर बोर्ड के फैसले पर बहस, कई लोग नाराज
जहां सेंसर बोर्ड के इस नए कदम का कई लोगों ने स्वागत किया है, वहीं, कुछ का कहना है कि इससे थिएटर्स में दर्शकों के फिल्म देखने का मजा एकदम किरकिरा हो जाएगा।
यूजर्स बोले- मजा किरकिरा कर दिया
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स का कहना है कि फिल्म देखते वक्त जब स्क्रीन पर बार-बार सबटाइटल्स और ऑडियो डिस्क्रिप्शन आएगा, तो इससे फिल्म देखने में काफी परेशानी आएगी। फिल्म का मजा ही खराब हो जाएगा। एक यूजर ने X पर लिखा है, ‘ये क्या? सभी फिल्मों में सबटाइटल होंगे? ये तो ध्यान भटकाने वाली बात है। अंग्रेजी फिल्मों के लिए तो समझ में आता है, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों के लिए क्यों?’

‘नीचे लिखे शब्द ध्यान भटकाते हैं’
एक और यूजर ने X पर लिखा है, ‘नीचे लिखे शब्द ध्यान भटकाते हैं। कई बार तो एक्टर्स के न बोलने पर भी सबटाइटल दिखाई देते हैं।’ एक ने लिखा, ‘मेरा हमेशा इसी से ध्यान भटक जाता है। हालांकि मैं तमिल हूं और तमिल फिल्में देखता हूं, लेकिन जब भी सबटाइटल आते हैं, मेरी नजरें बेवजह वहीं चली जाती हैं।’
‘फिल्म देखने का एक्सपीरियंस ही खराब हो जाता है’
एक और कमेंट आया, ‘बड़े पर्दे पर सबटाइटल होने से फिल्म देखने का एक्सपीरियंस खराब हो जाता है और कोई भी एक ही समय में पढ़ और देख नहीं सकता, यह बहुत डरावनी बात है।’

मालूम हो कि सबटाइटल और ऑडियो डिस्क्रिप्शन जैसे एक्सेसेबिलिटी फीचर्स कई इंटरनेशनल फिल्म मार्केट में पहले से ही आम हैं और ग्लोबल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स द्वारा खूब इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन अब सेंसर बोर्ड के नए निर्देश के साथ, भारतीय सिनेमा से भी इसी तरह के नियमों का पालन करेगा।




